Monday, March 28, 2011

मेरी पलकों में जो यादें हैं वो किसके नाम लिखूं!

तेरी नज़रें जो करती हैं, वो एक सवाल मुझसे,
तेरी नज़रों को समझूँ मैं और आज कुछ लिखूं,
तेरे, मैं इन सवालों का आज जवाब कुछ लिखूं,
तुझे उम्मीद है मुझसे, मुझे उम्मीद किस्मत से,
तेरी उम्मीद पे उतरूं या किस्मत आजमाऊं मैं,
मुझे भी ज़िन्दगी ने एक दिन पैगाम भेजा था,
मेरी भी सुबहें रोशन थी मेरे भी शाम रंगीं थे,
मेरी कसमें भी सच्ची थी, मेरे एहसास सच्चे हैं,
तुम्हारी कल्पनाएँ हैं,  मेरी यादें भी सच्ची हैं,
वो कसमें भूल जाऊं मैं, और फिर मुस्कुराऊं मैं,
ये मुमकिन हो नहीं सकता, के सबकुछ भूल जाऊं मैं!!!

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