Friday, April 8, 2011

चाँद

कल रात चाँद देखा था तुमने? मैंने देखा था ............
बहुत उदास बहुत तन्हा था वो,
उसकी शक्ल कुछ यूँ लग रही थी जैसे ...
जैसे सालों से उसने रौशनी का सामना ही न किया हो...
अँधेरे में खुद में सिमटा हुआ सा खड़ा था वो
जब मैंने उसकी ओर देखा ..तो मेरी ओर खीचा  सा आया था वो ...
शायद कुछ कहना चाहता था...शायद कोई पैगाम किसी खास के लिए देना चाहता था!!!!
हाँ अपने उस एहसास को शायद  वो उस तक  पहोचाना चाहता था .. जो उसकी ज़िन्दगी था....
या शायद उसके इस अँधेरे वजूद की वजह!

आज फिर आएगा वो कह कर गया था कल मुझे!....हो सके तो तुम  कुछ करना!!!
वो कहते हैं न किसी को अँधेरे से निकालो तो रौशनी की एक किरण हमपर भी पड़ती है!!!

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