Monday, April 11, 2011

याद

कुछ अनकही बातें, कुछ अनबुझे से पल,
कुछ धुंदली तस्वीरें यूँही याद आ गयी,
कुछ ख्वाबों का मजमा लगा,
एक ख्वाब ने यूँही जब गुदगुदाया,
तेरे चेहरे की मुस्कान यूँही याद आ गयी,
कई सदियाँ, पल में गुजारी थी,
कई लम्हे हमने चुराए थे,
वो लम्हे वो पल यूँही याद आ गए,  



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