Wednesday, April 27, 2011

चंद पन्ने

छेड़ के मुझको तेरा वो मुस्कुराना,
याद आता है किस्सा एक पुराना,
तेरी एक मुस्कान मेरे होश उडाती थी,
तेरी नज़रें मुझसे जब ये फरमाती थी,
तेरे पहलू में मुझे ये जहान मिलता है..
सच कहूँ मुझको सब..यहाँ मिलता है,
एक आँचल जो तेरा मेरे हाथों में आता है,
इसी धरती पे मुझको आसमां मिलता है
वो आँचल आज भी बेसहारे हैं,
कैसे कहें जीवन कैसे गुज़ारे हैं,
तेरी ही याद के अब तो बस सहारे हैं,
हाथ आये जो हमारे वो महज़..........
चंद पन्ने पुराने हैं,

4 comments:

  1. Bahut Sunder, Aur kuch kaho...RD

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  2. Thanks...zaroor aage bhi aapko sunne ko milta rahega.......Chandani

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  3. Excellent!!!! padh ke puraane dino ki yaad aa gayi

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  4. thanx bhaiya! i know aap kin dinon ki baat kar rahe hain :)........ Chandani

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