Tuesday, April 26, 2011

परेशां

वो यादें दफन कर दो, मुझे बस अब तो जाने दो,
परेशां हूँ बहुत मैं कुछ दिनों से,

तुम्ही ने शाम के तारों को तोडा,
तुम्ही ने रात का आँचल हटाया,
मेरे जीवन में फैला है अँधेरा
मुझे वीरानियों में अब तो रहने दो,
परेशां हूँ बहुत मैं कुछ दिनों से,


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