Friday, June 3, 2011

एक दिन

आज तुम्हारी  आवाज़ सुनके ऐसा लगा जैसे बरसों बाद ये आवाज़ सुन रही हूँ, तुम वही हो मैं भी वही, फिर वो क्या है जो हमारे बीच बदल गया है! हाँ कुछ तो बदला है, कुछ तो है जो मुझे तुम्हारी दूरी का एहसास दिला रहा है!

कुछ साल पहले एक शाम यूँहीं मुस्कुराकार तुमने अपने एहसास ज़ाहिर किये थे, खुशबू सी फ़ैल गयी थी मेरे चरों ओर, खुद में ही गुम होने लगी थी, रास्ते अनजाने थे मगर, अपने से लगने लगे थे, रोज़ मिलना, बातें करना सबकुछ कितना अच्छा सा लगने लगा था! ज़िन्दगी के तो मानो मायने ही बदल गए थे, एक शख्स, जो सीर्फ आपका है, ये एहसास कितना अच्छा लगने लगा था!

और फिर एक दिन………तुम्हारा साथ हमेशा हमेशा के लिए छूट गया!

कल शाम देर तक यूँही सागर किनारे खली पाँव मैं चलती रही, सागर की लहरें मेरे पाँव को छूती, मचलती और फिर चली जाती थी, ऐसा लगा जैसे तुम यहीं कहीं मेरे आसपास हो, उन लहरों ने अकेलेपन का वो एहसास और भी गहरा कर दिया जो मैं कहीं पीछे छोड़ आई थी, उन् एहसासों की वजह को भूल जाना चाहती थी………..

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