Wednesday, June 22, 2011

मुझको चाँद बुलाते थे तुम

उम्मीदों के दिये जलाकर,
मेरी दुनियां में हंस गा कर 
यादों को महकाते थे तुम 
मुझको चाँद बुलाते थे तुम 

कोरे से मेरे जीवन में,
अंधियारे से नील गगन में
सावन बन बरस जाते थे तुम,
मुझको चाँद बुलाते थे तुम

तन्हा रातों में उम्मीद की,
फूल ही फूल खिलाते थे तुम,
मुझको चाँद बुलाते थे तुम

जब कोई तारा टूटेगा,
हर सपना पूरा तब होगा,
ऐसा कह बहलाते थे तुम,
मुझको चाँद बुलाते थे तुम

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