Wednesday, June 29, 2011

सिफ़ारिश

आज तुम चाँद से सिफ़ारिश करना,
अपने मिलने की ख्वाइश... ज़ाहिर करना,
गर वो पूछे तो कहना उस से,
मैंने तारों को समेटा है अपने आँचल में,
और ज़मीं पे बनाया है एक छोटा सा घर,
उसी घर में गुजारेंगे हम 'वो पल',
जिनको पाने की तमन्ना है दिल में सदियों से,
तेरे तारे भी गवाही देंगे, 
अपने ही आसमान के आगे,
अपनी कलियों को खिलाएंगे हम ,
इस पत्थर जहान के आगे,
आज तुम चाँद से सिफ़ारिश करना,
अपने मिलने की ख्वाइश... ज़ाहिर करना,

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