Saturday, September 10, 2011

ये घर अब मेरा छोटा है,

तू जो लौटा तो बड़ी देर से तू लौटा है,
तेरे कद के लिए, ये घर अब मेरा छोटा है,
रूठकर तू जो एक बार गया था मुझसे,
छोड़कर हाथ मेरा, मुह भी तूने मोड़ा था,
मेरी आवाज़ भी तुझतक पहुच ना पाई थी,
मेरे आंसू, मेरे दामन भिगोते जाते थे
कभी रोते हुए जो सिसकियाँ भी निकली तो,
मैंने उनको भी खुद में बस यूँही छुपाया था,
तेरे जाने से सारे ख़ाब मेरे टूट गए,
तेरे जाने से मेरी शक्सियत अधूरी हुई,
मेरे ज़ख्मों पे ज़माना भी मुस्कुराया था,
पर मेरी यादों में तब भी वो तेरा साया था
दिन भी गुज़रे थे वैसे ठीक जैसे रात  गुज़री ,
तेरे यादों की डली लेते हुए साल  गुज़री 
कई सालों तक मुरके तूने कभी देखा नहीं,
मेरी हालत , मेरी चाहत , की तुझको परवाह ही नहीं
और जब टूटकर बिखरने को तैयार हुई,
रस्में दुनियां को निभाने मैं तैयार हुई,
तब तू लौटा है जब मैं ज़िन्दगी से हार गयी,
तू जो लौटा तो बड़ी देर से तू लौटा है,
तेरे कद के लिए, ये घर अब मेरा छोटा है,

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