Tuesday, October 11, 2011

कुछ रिश्ते अपरिभाषित होते हैं !

कुछ रिश्ते अपरिभाषित होते हैं !
रिश्तों की परिभाषा क्या है ! रिश्ता वो है जो वक़्त पर काम आए ? या रिश्ता वो है जो हर वक़्त साथ रहे ! रिश्ता वो है जो हमें जन्म के साथ मिला है या रिश्ता वो है जो समाज के ठेकेदारों ने क़समें देकर बाँध दिया हैं ! रिश्ता वो है जो तकदीर से मिलता है या रिश्ते वो होते हैं जो दिलों से जुड़ते हैं !!!
रिश्तों की परिभाषा को समझ पाना शायद उतना ही कठिन है जितना रिश्तों को निभा पाना ! हाँ शायद यही सच है !!
कुछ अरसे पहले मुह मोड़े के चले गए थे तुम , जाते जाते बस इतना कहा था तुमने के आज मेरी क़द्र नहीं जानी तुमने , एक रोज़ मैं बहोत याद आऊंगा तुम्हे ! और तब मुझे ढूंढती फिरोगी , पर मैं नज़र नहीं आऊंगा !
कहाँ खोया है मेरा चाँद, अमावास कितनी लम्बी है,
चले आओ जहाँ हो तुम, कोई बिलकुल अकेला है!

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