Monday, October 24, 2011

क्यूँ

सबकुछ है आसपास में, फिर ये खालीपन क्यूँ है !
आज इस घर में बेचैन नज़र यूँ क्यूँ है !
मुझको हंसने का सबक जिस शख्स ने दिया था ,
आज उसी की नज़र में हम मुजरिम क्यूँ हैं!

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