Monday, September 3, 2012

पर उसके लिए आसान न था… अगली सीढ़ी से फिर पिछली सीढ़ी पर लौटना!

पर उसके लिए आसान  न था… अगली सीढ़ी से फिर पिछली सीढ़ी पर लौटना!

“मैं तुम्हारा साथ ना दे पाउँगा चाँद, मुझे भूल जाना!हम दोस्त हैं और हमेशा रहेंगे इससे ज्यादा की गुंजाईश नहीं! मैं यथार्थवादी हूँ, जो सच है वो यही के तुम और मैं एक दूसरे के लिए नहीं बने, इस सच को स्वीकार करना ही एक मात्र उपाय है”

और वो चला गया, चाँद स्तब्ध एकटक बस देखती रही! दिन गुज़रे शामें गुजरीं, जानेवाला लौटकर ना आया! पर उसकी यादें पीछा छोड़ने का नाम ही ना लेती, घंटों, पहरों गुज़र जाते, पर खुद को मालूम ना होता के वो क्या सोच रही है, क्यूँ सोच रही है, किसके लिए सोच रही है, उसके लिए जो अब वापस ना आएगा, उसके लिए जिसने जाते हुए एक बार पलटकर ना देखा! कई बार खुद को झकझोरती, पूछती खुद से के क्यूँ सोच रही है पगली, उसके बारे में जिसकी सोच में तू कभी शामिल ही ना थी, जो कभी तेरा था ही नहीं! खुद से हर बार वादा करती.... अब और नहीं सोचूंगी, भूल जाउंगी उसे, पर सोच रुकने का नाम ही ना लेती! लोगों का साथ जैसे उसे काटने को दौड़ता था, ना घर में चैन था ना दफ्तर में! दिन रात एक सवाल ज़हन में घूमता“मैं खुद को संभाल क्यूँ न सकी, मेरी सोच की सीमा मुझसे तय क्यूँ ना हो सकी, जिस रास्ते कि कोई मंजिल ही ना थी, क्यूँ उस रास्ते पे सीर्फ एक साए के साथ इतनी दूर निकल आई, साया..हाँ सीर्फ साया ही तो था उसका! और तो कुछ भी नहीं!

उनसे मुलाक़ात बस यूँही हुई थी ………और पहचान बहोत जल्द दोस्ती में तब्दील हो गयी! पर एहसासों को बांध पाना किसी रिश्ते के बस की बात कहाँ! उसके ज़हन में दिन रात एक ही चेहरा घूमने लगा, खुद में खुश रहने लगी, ज़िन्दगी की सारी सच्चियां जानने के बावजूद, वो सपनो की दुनिया में रहने लगी! उन्ही के शेर पढ़ती, उन्ही की कहानियां! उन्ही की तस्वीर उसकी नज़रों के सामने घूमती रहती, हर एक चेहरे में वो एक चेहरा तलाश करती, हर एक आहट में बस उनकी आहट तलाश करती! उनकी हर कहानी में खुद को तलाशती! पर उसकी हर तलाश सीर्फ एक तलाश बन कर रह गयी! वो कहीं नहीं था! कहीं भी नहीं! पर चाँद अब भी इंतज़ार में थी,
 
के आएगा एक दिन वो लौटकर कभी,
उसे भी एक दिन मेरे दिल की खबर होगी!
उसकी भी रात गुजरेगी तारों को गिनते गिनते,
उसकी भी आँख मुझको तलाशेंगे चलते चलते,



दिल ने कब माना है रस्मों को रिवाजों को, दिल ने कब माना है उम्र की हकीक़तों को!

लोग कहते हैं
आज भी सूनी सड़कों पर तनहा फिरती है उसके शेर लिए,
एक तस्वीर अब भी छुपाती फिरती है सब से..
उम्र गुजरी है इंतज़ार में!

No comments:

Post a Comment