Saturday, September 8, 2012

क्यूँ

क्यूँ गम का सफ़र और मुझसे कट'ता नहीं,
क्यूँ चैन मुझे अब कहीं भी मिलता नहीं,
हाथों से तेरा दामन बस छूटने को है,
होठों की हंसी भी चंद लम्हों की है,
उम्मीदों का ये सिलसिला क्यूँ टूटता नहीं नहीं,
क्यूँ चैन मुझे अब कहीं भी मिलता नहीं!
गुज़रे पलों के साये, है साथ अभी तक,
गुज़रे लम्हों ने अबतक दामन नहीं छोड़ा,
क्यूँ ख्वाइशों का सिलसिला ये टूटता नहीं,
क्यूँ चैन मुझे अब कहीं भी मिलता नहीं!

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