Wednesday, October 10, 2012

किसका है

इस आईने में भी पहचान अपनी नज़र आती नहीं,
मेरे चेहरे पर एक और चेहरा किसका है,
इन्ही आँखों से झांकती थी जो हंसी अक्सर,
इन्ही आँखों में ये उदास अक्स किसका है!

खामोश है जुबां फिर भी
दिल शोर मचाता है,
गुमसुम है ये नज़र फिर भी,
मन क्यूँ घबराता है!

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