Saturday, November 24, 2012

ये ज़िन्दगी कभी मुकममल सी लगती है...

मुझे अब भी याद है कई बार मेरे बाल खुले होते और मैं तुम्हारे पैर पर सर रखकर लेटी होती, एक बार यूँ भी हुआ के तुम अचानक ही बोल पड़े.......’तुम्हारे बाल थोड़े और लम्बे होते न तो तुम एकदम हेमा मालिनी दिखती....और जो आगे चेहरे पर एक लट होती तो बस मीना कुमारी लगती, और’......................बस इतना ही कहा था तुमने के मैं तुमसे रूठकर चली गयी थी कमरे से, और बालकनी में खड़ी हो, उस चाँद को देखने लगी थी के तुम मेर...
े पास आये और मेरा चेहरा अपनी हथेली में थाम कहा था ‘पर इस से क्या होता है...मुझे तो चाँद मिला है, जो बस एक ही था...और ये सुनते ही मैं शर्मा गयी थी, मैंने पूछा था ‘चाय पिओगे?’ तुमने किस तरह मुस्कुराते हुए कहा था, ‘हाँ, पर मैं बनाऊंगा, जब मैं तुम्हे अपने हाथों से चाय बनाकर पिलाता हूँ तो बहुत अच्छा लगता है’ तुम चाय बनाने पर अक्सर जोर डाला करते थे, वजह बस इतनी थी, के चाय बाने के बाद तुम मुझे कप में नहीं बल्कि ग्लास में चाय देते थे और इतना देते थे के ख़त्म होने में वक़्त लगे, और उतने वक़्त तक मैं तुम्हारे सामने बैठी रहूँ और तुम अपनी कविताएँ सुनाते रहो...सुनाते सुनाते कई बार तुम पूछा भी करते थे ‘बोर तो नहीं हो रही न?’ और मैंने हर बार बस एक ही जवाब दिया था..........’तुमसे जुडी कोई भी बात मेरे लिए अनमोल है’

जानते हो मैंने तुमसे कभी कहा नहीं....पर अक्सर जब मैं साड़ी पहनती तो पहनने के बाद ये देखती के मेरी साड़ी का कलर तुम्हारे शर्ट के कलर से मैच कर रहा है या नहीं....तुम्हारे साथ अपने पसंद को मिलाना बड़ा अच्छा लगता था...

कई बार यूँ भी हुआ के जब आईने के सामने तुम खड़े हुए तैयार हो रहे थे और मैं तुम्हारे करीब आकार खड़ी हुई और तुमने कहा... हमदोनो की जोड़ी कितनी अच्छी लगती है न.............दुनिया की नम्बर वन जोड़ी है......................’

यादें जाने कितनी हैं,
बातें जाने कितनी हैं,

ये ज़िन्दगी कभी मुकममल  सी लगती है...
और कभी साँसों की भी कमी सी लगती है....

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