Saturday, December 22, 2012

इंतज़ार

शाम करीब छ: साढ़े छ: का वक़्त था, चाँद को जाने अचानक क्या हुआ कि उठी और निकल पड़ी समंदर के किनारे, वो अक्सर आया करती थी, जब भी बेहद तनहा महसूस करती....आज भी कुछ ऐसा ही हुआ था, उसके कदम आगे की ओर चलते जा रहे थे और वो..........................................

अभी तुम्हे बेहद शिद्दत से याद किया और चाहे अनचाहे उम्मीद कर बैठी के तुम आओगे पर तुम नहीं आए....एक गाना सुन रही थी और सुनते सुनते बहुत रोई.. हाँ ये कोई ख़ास गाना नहीं था, पर ये गाना हमारे नए नए प्यार का गवाह है... जाग उठी हैं नींदें, चैन कहीं खो गया है उन दिनों ऐसे अलबम सोंग्स आया करते थे, ये गाना तुम जब भी देखते, तो देखते ही तुम्हारे चेहरे की मुस्कान खो जाती, इस गाने में नायिका ने बेवफाई की है....तुमने एक बार मेरा हाथ थाम मुझे रोक लिया था, और पूछा था, चाँद, तुम इतनी खूबसूरत हो, और मैं एक सिम्पल सा लड़का, कहीं....कभी तुम्हे, तुम्हारी पसंद पर अफ़सोस तो नहीं होगा? मुझे छोडोगी तो नहीं न? तुम्हारी बात सुन मेरी पलकें भीग गयी थी और मैं बस इतना ही कह पायी थी कि तुम उदास न हो, मेरी ज़िन्दगी में तुम्हारे सिवा कोई न आएगा...तुम्हे मैंने अपना सबकुछ माना था, इस से ज्यादा कुछ कहना नहीं आता था, उम्र भी कम थी और अपने एहसास को ज़ाहिर करने का तरीका तब भी नहीं आता था, आज उस वक़्त को गुज़रे दस साल हो गए, इन दस सालों में सबकुछ बदल गया, हमदोनो ने सिर्फ एक ही क़सम खायी थी कि चाहे हालात बदल जाएं, चाहे दुनिया, चाहे परिस्थिति प्रतिकूल हो जाए, पर हमारे एहसास कभी न बदलेंगे, मैंने जाने कितनी ही बार कहा था कि मेरे लिए मैं खुद इतना मायने नहीं रखती जितना तुम रखते हो, वो सारे व्रत उपवास जो अमूमन एक ब्याहता करती है, वो मैं किया करती थी, और शाम को तुम पेप्सी पिलाते और अपने हाथों से समोसे का एक टुकड़ा खिलाकर मेरा व्रत खुलवाते, और मैं तुम्हारे पैर छूकर तुम्हारा आशीर्वाद लेती, जानते हो वो पैर छूने का रिवाज़ बचपन से देखती आई थी, जब माँ..बाबूजी का पैर छूती और बाबूजी मुस्कुराते हुए माँ को सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद देते....तो हमेशा यही सोचा करती थी, कि  क्या कभी मेरी ज़िन्दगी में कोई ऐसा ही इंसान आएगा, जिसकी मैं इतनी श्रद्धा करूँ, जिसका मैं इतना सम्मान करूँ? और मुझे तुम मिल गए...तुमने मुझे पूर्णता का एहसास दिलाया, सच.... कभी कभी सोचती हूँ, कि  तुमसे मिलने से पहले भी तो ज़िन्दगी थी मेरी, पर पहले की हर बात फीकी सी लगती है, हर मुस्कान में खोखलेपन का एहसास है, और हर दिन बेमाने से...मेरी ज़िन्दगी को मायने तुमने दिए..........मुझे अब भी याद है मेरे व्रत वाले दिन तुम बार बार फोन करते और पूछते कि कमजोरी तो नहीं लग रही और शाम ऑफिस से जल्दी निकल के मुझे पिक करते...मेरा चेहरा देख तुम्हारे चेहरे पर मुस्कान बिखर जाती, फिर तुम कहते... क्यूँ करती हो ये सब? तुम्हे इस तरह व्रत करने की क्या ज़रुरत है? मैं तो हूँ ही तुम्हारे पास, तो मैं हँसते हुए कहती... करती हूँ कि कहीं मेरे विश्वामित्र पर किसी मेनका की नज़र न पड़ जाए और तुम कहते, बस एक ही मेनका उपरवाले ने बनायी थी इस विश्वामित्र की तपस्या भंग करने के लिए..........ये बात तुमने जाने कितनी ही बार कहा है, पर हर बार तुमसे ये सब सुनना अच्छा ही लगा है, सच...तुम जब कभी मजाक में मुझे मिसेज़ बोलके अपना सरनेम जोड़ते तो बहुत अच्छा लगता था, एक बार याद है, जब तुम्हारी बाईक रेड लाइट पर रुकी थी और एक भिखारन आई थी पैसे मांगने, अमूमन तुम मना कर देते और मैं भी नहीं देती...पर उसने कहा था तुमदोनो की जोड़ी सलामत रहे फिर तो तुम हंस पड़े, क्यूंकि तुम जानते थे के अब मैं अपने पर्स से ज्यादा से ज्यादा पैसे उसे दे दूंगी...मेरे पैसे देने के बाद तुमने कैसे हँसते हुए कहा था, तुम्हे तो कोई भी बेवकूफ बना सकता है, बस मेरा नाम ले ले...और तुम अपनी सारी संपत्ति उसके नाम कर दोगी...ये सब कहते हुए तुम्हारे चेहरे पर एक चमक, एक गर्व का भाव था, जैसे तुम्हे इस दुनिया में सबसे बेहतर लड़की मिल गयी है, जो मात्र एक लड़की नहीं, बल्कि तुम्हारी संपत्ति है....तुम हँसे जा रहे थे, और मेरी नज़र बाईक के साइड मिरर पर टिकी थी........सच तुम्हारे चेहरे पर मुस्कान बेहद अच्छी लगती थी,

अब भी लगती है...मुझे तुम बेहद पसंद हो...कल भी थे, आज भी हो...हाँ आज भी हो....हर रिश्ते में ग़लतफ़हमी आती है, हमारे रिश्ते में भी आई है, तुम्हे लगने लगा है कि मुझे तुमसे प्यार नहीं,...पर बात बस इतनी सी है कि  दुनियादारी, परिस्थिति और वक़्त इन सब ने अपना असर मुझपर छोड़ा है, पर तुम्हारे लिए एहसास अब भी वही हैं...आज भी तुम्हारी एक आहट के इंतज़ार में शाम गुज़र जाती है, आज भी तुम्हारा कोई नाम ले तो, दिल की धड़कने अपनी गति भूल जाती है, आज भी मेरे चेहरे पर आई हर मुस्कान की वजह सिर्फ तुम हो, शादी के पहले भी हमारे बीच कई बार तलाक़ हुए और कई बार सुलह....पर इतने सालों में ऐसा कभी पहले नहीं हुआ कि तुम जाओ, और फिर लौटकर न आओ...पर इस बार.....................

चाँद तनहा अकेली, चली जा रही है, समन्दर की लहरों से लडती, वो तनहा है, हर पल हर घडी, पर एक भीड़ उसको घेरे है, उसे कहीं चैन नहीं....कहीं भी नहीं....सिर्फ एक इंतज़ार है.. उस शख्स का ...जो उसका सबकुछ है...सबकुछ.......

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