Monday, December 24, 2012

तुम्हारा इंतजार है.......

'ग़ज़ब है तुम्हारी याद भी कि आती है जब भी  
लिए जाती है मेरा हाथ पकड़कर दूर रेगिस्तानों में,
भटकती हूँ देर तलक, उन्ही बंजर रेतों पर,
करती हूँ इंतज़ार सुबह होने का,
सोचती हूँ एक बार आओगे तुम मेरा हाथ थामोगे और
कह दोगे वो सब जो सुनने के लिए ही बस मैं जिंदा हूँ'

'हालाँकि क्या कुछ नहीं करती हूँ मैं,
तुम्हारा ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए,
मिसाल के तौर पर,
हर शाम सूरज से करती हूँ गुजारिश
कि लौट जाए वो
और आने दे चाँद को उस नीले नभ पर,
कि चांदनी छुए तुम्हारे चेहरे को और
तुम्हे मैं याद आऊं'
 
'कभी तो फेर दे नज़र इस तरफ भी ऐ ज़ालिम,
तेरी खामोश नज़र मुझे हर पल ही क़त्ल करती है...'

2 comments:

  1. 'कभी तो फेर दे नज़र इस तरफ भी ऐ ज़ालिम,
    तेरी खामोश नज़र मुझे हर पल ही क़त्ल करती है...'

    वाह वाह !

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