Tuesday, December 25, 2012

प्यार बस प्यार होता है...

उम्र चाहे कोई भी हो, जब प्यार होता है, तो लडकियां अक्सर बच्चों की सी हो जाती है, अपने प्रियतम से गिला, शिकवा करना, रूठना, नखरे करना, ये सब जैसे खुद-ब-खुद आ जाता है, तनहा हो या भीड़ में, बेवजह मुस्कुराने लगती है, कभी कोई भूले से नाम भी ले ले उनका, तो आँखों में एक खास चमक आ जाती है..सड़क पर चलते हुए अमूमन लड़की हर राहगीर में अपने प्रियतम को तलाशती है..कभी यूँ भी होता है वो किसी को देख मुस्कुरा रही होती है, इस बात की कोई परवाह नहीं होती उसे, कि जिसे वो देख मुस्कुरा रही है, वो कौन है, असल में वो देख ही नहीं रही होती, उसकी नज़रें भले ही उस शख्स पर टिकी हो जो सामने है, फिर भी उसकी ज़हन में किसी ख़ास का चेहरा होता है..दिल में हर वक़्त जैसे जलतरंग बज रहे होते हैं..वो बस खुश होती है...

प्यार सोच समझ कर नहीं होता...बस हो जाता है.., प्यार में दीवानगी लाज़मी है, प्यार में हदें तय नहीं होती, प्यार में कोई पराया नहीं लगता, प्यार में कभी बंधन महसूस नहीं होता.. प्यार एक खुशनुमा एहसास है..प्यार एक साज़ है, संगीत है, प्यार गीत है, प्यार ही ख़ामोशी है और प्यार ही आवाज़ भी..हर शख्स इस अहसास से कम से कम एक बार ज़रूर गुजरता है, सही मायने में वो इंसान ही तभी बनता है, जब उसे प्यार होता है... ‘प्यार जिससे हो, ये ज़रूरी नहीं कि वो सबसे बेहतर हो, पर एक बार प्यार हो जाए तो उससे बेहतर कोई नहीं लगता’...प्यार के लिए कोई उम्र निश्चित नहीं, प्यार की कोई हद निश्चित नहीं...प्यार एकतरफा या दोतरफा नहीं होता...प्यार बस बसता है अन्दर...हमारे अन्दर है, हमारे रगों में खुशबु की तरह फ़ैल जाता है, वो खुशबु होती है उसके नाम की, प्यार कभी ख़त्म नहीं होता, प्यार असीम है, प्यार शरीर का मोहताज नहीं प्यार रूह में बस्ता है..प्यार को शब्दों में बंधा नहीं जा सकता, प्यार की कोई परिभाषा नहीं........प्यार बस प्यार होता है...

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