Wednesday, December 5, 2012

एक सुकून

कितनी अजीब बात है न, दिल कभी अपनी नाकामी पर अफ़सोस करता है, कभी रोता है, कभी बेचैन सा हो जाता है, कभी यूँ भी देखा है, कि एक मायूस सी रात मेँ सुकून की लहर सी दौड़ गई जब ये सोचा कि तुम्हारे पास कोई है जिसे तुम्हारी फ़िक्र है, जो तुम्हारा ख़्याल रखती हैँ, अच्छा एक बात बताओ क्या अब भी रात को जब तुम गहरी नीँद मेँ होते हो, तो फेँक देते हो रज़ाई, और सो जाते हो एक मासूम बच्चे की तरह ख़ुद मेँ सिमट कर, वो फ़िर से रज़ाई तुम्हे ओढ़ाती तो है न ठीक उसी तरह के जिस तरह मैँ होती थी नीँद मेँ पर जाने कैसे रात भर टंगी रहती थी एक निगाह उस बिस्तर पे जहाँ तुम कभी करवट बदलते, और कभी औँधे परे देखते रहते मुझे एकटक.......
 

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