Monday, December 10, 2012

आँखें

अमूमन लोगोँ को कहते सुना है कि मेरी आँखेँ बहुत गहरी हैँ, ये आँखेँ बहुत कुछ कहती हैँ, किसी ने ये भी कहा था कि डोरे देखेँ हैँ इन आँखोँ मेँ तो किसी ने वो राज़ जानने की कोशिश भी की जिसकी हर तार जुड़ी है सिर्फ़ तुमसे, किसी ने इन आँखोँ मेँ बसी उदासी का सबब जानना चाहा तो कोई पूछ बैठा कि इंतज़ार किसका है? कभी यूँ भी हुआ कि आँखो के कोरोँ से झलक पड़ी एक मुस्कान जो पनपी थी उस एक लम्हे मेँ जब तुमने नज़रोँ से मुझको छुआ था....कितनी अजीब बात है न कि तुम न तो आँखोँ की भाषा ही पढ़ सके न मेरी जुबां ही समझे......................

No comments:

Post a Comment