Tuesday, January 22, 2013

सुकून

तुम्हारी आँख बचाकर करती रही हूँ बातें तुमसे,
बारहा तुम्हारे काँधे पर रखा है सर अपना,
बारहा तुम्हारे बालों में फेरी है उंगलियाँ मैंने,
तुम्हारी एक तस्वीर रखी है महफूज़ करके अपने आँचल में,
तमाम शब् गुजरती है उसको सीने से लगाए हुए,
जो ख्वाबों में भी आते हो, तो फासला दरमियान नहीं होता,
मेरे जीवन में तुम थे, बस एक तुम हो, तुम ही रहोगे,
तुम्हारे जाने की तारिख भी अब दर्ज नहीं मेरे केलेंडर में,
वो तमाम यादें जो दिलाती थी याद मुझको, तुमको खोने की,
वो तमाम वजहें ख़त्म कर के, मिटा दिया मैंने,
मुझे सुकून है, तुम हो यहीं हो मेरे पहलू में,
मेरी मुस्कान सच्ची है, तुम्हारा प्यार सच्चा था..

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