Monday, January 28, 2013

बस यूँ ही......

वो वक़्त जो बीत चुका है, गुजरता क्यूँ नहीं?
ये लम्हा जो मुश्किल से मिला है, ठहरता क्यूँ नहीं?
वक़्त अपनी ही रफ़्तार से चलता क्यूँ है?
कोई इल्तेज़ा कोई हुक्म सुनता क्यूँ नहीं??
 
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बस दो ही मसले हैं मेरी ज़िन्दगी में,
गुज़रे हुए वक़्त में मिले दर्द का हिसाब रखना,
आने वाले वक़्त की फिक्र में दिन गुज़ारना......
 
****

मेरे और उसके बीच सबकुछ टूटा है....तो बस टूट ही गया,
बातों में भी अक्सर तल्खियां ही रहती है,
नज़रें बुझी हुई जुबां खामोश रहती है,
भूले से जो कभी नाम आ जाए मेरा...उसके होठों पर,
अपने ही दांतों से फिर होंठ काट लेता है अपनी,
चार बूँद आंसू के साथ निकल जाती है मेरी फिक्र उसके दिल से..
 
****
 
अधजगी सी नीँद है, अधखुली सी आँखे,
अधूरा सा इश्क है अधूरी सी बातेँ....

7 comments:

  1. मंगलवार 30/04/2012को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं ....

    आपके सुझावों का स्वागत है ....
    धन्यवाद .... !!

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    1. बहुत शुक्रिया आपका विभा जी...जो ज़िन्दगी ने समझाया है बस वही लिखती हूँ, आपको पसंद आया ये मेरी खुशकिस्मती.

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    2. आपने लिखा....हमने पढ़ा
      और भी पढ़ें;
      इसलिए कल 30/04/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में)
      आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
      धन्यवाद!

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    3. शुक्रिया यशवंत जी...आपका भी और विभा जी का भी
      मेरी बातें तो आम थी....आपने ख़ास समझा उसके लिए शुक्रिया आप सबों का.

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  2. लाजवाब |

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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    1. शुक्रिया...
      जी ज़रूर आएँगे.

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