Thursday, January 3, 2013

बस यूँ ही......

एक तस्वीर ने मोड़ दिया रुख,
बहती हवा का,
छटती घटा का,
गुनगुनाती फ़िज़ा का,
एक हकीक़त ने तोड़ दी डोर,
तेरे तसव्वुर की,
चंद खाबों की,
और उम्मीदों की..

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