Wednesday, January 9, 2013

मुझे है याद वो सब जो कभी हुआ ही नहीं.....................................

यूँ भी कई बार हुआ है कि मैं आई हूँ घर लौटकर ऑफिस से, और माँ ने बनाए हैं गर्म पकौड़े और लिए आई है वो कमरे में जहां बैठी हूँ मैं अपने बाबूजी के साथ, और सुना रही हूँ सुबह से शाम तक हुए हर वाक़ये के बारे में, हम तीनो हंस रहे हैं, और मैं एक पल को ठहर जाती हूँ अपने बाबूजी का हँसता चेहरा देखकर, उनके चेहरे पर निश्चिंतता है, गर्व है कि वो मेरे पिता है...

और कभी यूँ भी हुआ है कि मेरी शादी का दिन तय हुआ और मेरे बाबूजी अपने व्यस्त समय में से ज़रा  सा समय निकालकर आए हैं मेरे पास और मेरे सर पर हाथ फेरते हुए कहा उन्होंने, आज तुझे मुझसे दूर जाना है, तू जानती है कि तेरे बगैर एक दिन भी जीना मुश्किल है मेरे लिए मेरी लाडली, पर यही जीवन है, ज़िन्दगी में हमेशा खुश रहना और ख़ुशी ही बांटना, तू जब जब मुस्कुराएगी मुझे मालूम चल जाएगा, और मैं भी खुश होऊंगा, ज़्यादा याद आई तो सबकुछ छोड़ तेरे पास जाऊंगा, जितना प्यार मैंने और तेरी माँ ने दिया है तुझे उसे तुझे आगे सबपर न्योछावर करना है, अबतक तेरे अधिकार’ की ज़िन्दगी थी, अब तेरे कर्तव्य’ की ज़िन्दगी होगी, मेरी डोली उठ रही है और मेरे बाबूजी की आँखों में आंसू है, मैं दौड़कर लौट आती हूँ, मेरे पिता मुझे गले लगाकर मुझे सँभालते हैं और फिर थमा देते हैं मेरा हाथ मेरे पति के हाथों में..............

और कभी यूँ भी हुआ कि मेरी छोटी सी बिटिया को बिठाए वो अपनी पीठ पर बने हैं घोड़ा, मेरी बेटी की किलकारियां और मेरे बाबूजी की हंसी से सबकुछ हुआ है जीवंत, हमसब खुश हैं....

मुझे है याद वो सब जो कभी हुआ ही नहीं.....................................

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