Saturday, February 16, 2013

बस यूँ ही......

एक हसीं ख्वाब है ज़िन्दगी,
या हकीक़त की राख है ज़िन्दगी!
खिलखिलाती सुबह है ज़िन्दगी,
या काली सियाह रात है ज़िन्दगी,
गलियों का मोड़ है ज़िन्दगी,
या मंजिल का इंतज़ार है ज़िन्दगी!
बहारों का आस है ज़िन्दगी,
या पतझड़ का फूल है ज़िन्दगी,
अपनों का साथ है ज़िन्दगी,
या तन्हाई का एहसास है ज़िन्दगी
 

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