Wednesday, February 20, 2013

बस यूँ ही.....

वो महज़ एक नाम है,
एक तस्वीर है,
एक आवाज़ ही तो है,
फिर ये दीवानगी कैसी?

क्या इश्क करने के लिए जिस्म का होना ज़रूरी है!
 

****

सोचा न था जीतेजी कभी ऐसा मकाम भी आएगा,
हर एक पल जीवन का जब दिनचर्या बनके रह जाएगा,
प्यार, ख़ुशी, सुकून को दिल इस क़दर तरस जाएगा,
ये सब एहसास मेरे लिए एक शब्द बनके रह जाएगा.....
 

****

वक़्त के साथ उसको भी बदलते देखा,
ज़िन्दगी तुझमें जाने हमने क्या देखा....

2 comments:

  1. बहुत ही बढ़िया


    सादर

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    1. Yashwant ji...even i like some..

      वो महज़ एक नाम है,
      एक तस्वीर है,
      एक आवाज़ ही तो है,
      फिर ये दीवानगी कैसी?

      क्या इश्क करने के लिए जिस्म का होना ज़रूरी है!

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