Friday, March 8, 2013

बहिष्कार

कोई कैसे कर देता है बहिष्कार
उन यादों का,
जो बनती है पल पल को जोड़ के,
उस प्रेम का,
जो होती है धीरे धीरे... एहसासों के उगने से,
जो फलती हैं,
लम्हों की सिचाई से,
कोई कैसे कर देता है बहिष्कार,
उस शख्स का,
जो मान बैठता है आपको अपना सबकुछ,
जिसकी हर आती जाती सांस में बसे होते हैं आप,
जो सबसे दूर हो जाता है,
सिर्फ एक आपका साथ पाने के लिए,

कोई कैसे कर देता है बहिष्कार!

6 comments:

  1. मैंने जब से आपको पढना शुरू किया(२०११) है तब से अब तक, इतना अधिक क्रन्तिकारी सुधार आया है कि मैं बता नहीं सकता. बेहतरीन है यह भी.

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    1. आप पढ़ते हैं और आपको पसंद आता है...बस इतना ही काफी है मेरे लिए..
      बहुत शुक्रिया आपका प्रशांत जी.

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  2. स प्रेम का,
    जो होती है धीरे धीरे... एहसासों के उगने से,
    जो फलती हैं,


    waaah,,,,,,,,ye lines to bahut psnd aayii mujhe............aaj pahunchi hun aapke blog pe...dheere dheere sabhii pnne paltungii....
    bahut bahut shukiryaa...mere blog tak aane aur mere likhe ko sraahane ke liye


    aate rahiye....bulaaate rahiye...........
    take care

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  3. sachmuch ...koi kaise kar deta hai bahishkaar?....bohat achha likhti hain aap..thank you for visiting my blog...age bhi ate rahiyega..
    regards
    aparna
    http://boseaparna.blogspot.in/

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  4. शुक्रिया अपर्णा जी.....
    जी ज़रूर आयेंगे...

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