Thursday, April 11, 2013

तुम

तुम उतने आसन नहीं...जितने नज़र आते हो.
खामोश तो हो...पर अनगिनत उलझनों से घिरे हो,
मुस्कुराते भी हो तो सिर्फ रस्म निभाने के लिए,
साथ चलते हो फिर भी तनहा अकेले से रहते हो,
तुम कुछ कहते नहीं...पर आँखें तुम्हारी, चुप रहती नहीं...
ग़ज़ब है तुम्हारी अदा भी...कि क़त्ल हो जाए कोई तुम्हारे हाथों..
और तुम्हारा भोला चेहरा देखकर खुद ही अपनी गवाही से मुकर जाए....

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