Tuesday, April 30, 2013

आज मुझे ग़म नहीं.....


मैंने आज अपनी परछाई देखी...तुम्हारे घर में,
देखो न..वो भी तुम बिन रह नहीं सकती,
कितना प्यार करती है तुमसे,
मैंने देखा उसकी आँखों में,
ढेर सारा प्यार सिर्फ तुम्हारे लिए,
उसकी आँखों की सच्चाई,
और होठों पर निश्छल मुस्कान,
जब वो सोती है तुम्हारी बाहों में,
और देखते हो तुम उसे प्यार भरी नज़रों से,
तो दिल भर आता है मेरा,

आज इस दिल में छुपा लिया है मैंने,
तुमदोनो के उस ख़ास लम्हे को,
आज मुझे ग़म नहीं तुमसे जुदा होने का,
कि मुझ सा प्यार देने वाली आज तुम्हारे पास है,
हाँ वो तुम्हारी बेटी ज़रूर है, पर हमारा ख्वाब है....

7 comments:

  1. आपने लिखा....हमने पढ़ा
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए कल 02/05/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    धन्यवाद!

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  2. सुंदर अहसास किंतु ममता का विकल्प हो ही नहीं सकत........

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    1. जी अरुण जी..पर अमूमन फैसले इच्छा अनुसार नहीं हुआ करते..

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  3. कि मुझ सा प्यार देने वाली आज तुम्हारे पास है,
    हाँ वो तुम्हारी बेटी ज़रूर है, पर हमारा ख्वाब है....touching...

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  4. बहुत उम्दा..... भावों की सटीक अभिव्यक्ति

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