Thursday, May 23, 2013

हदें

मुझको मेरी हदों के अब पार जाना है,
मुश्किल है मगर, इस बार जाना है,
दर्द दिल का अब आँखों से उतर जाएगा,
तुम पास ही बैठे रहो, ये वक़्त गुज़र जाएगा,
रूठी सी ज़िन्दगी है, जिसको मनाना है,
मुझको मेरी हदों के अब पार जाना है..

तन्हाई थी, बेबसी थी, मुस्कान को तरसे थे,
उन दिनों बिन मौसम ही सावन बरसे थे,
आँखों से आंसुओं का रिश्ता पुराना है,
मुझको मेरी हदों के अब पार जाना है..

‘रिश्ता’ हदों में बंधकर, रिश्ता नहीं रहता,
अपना ही घर कभी फिर अपना नहीं लगता,
इन सरहदों के पार मुझे घर बसाना है
मुझको मेरी हदों के अब पार जाना है...

1 comment:

  1. Baahut Sunder!
    Ye haden kisne banai, zara ho sake to mujhe batana,
    In bandishon ko apne man se mitana,
    fir daayron se apni Aage nikal jaana,
    mushkil nahi kuchh bhi,
    jo Tum chaah lo badal dena,
    Zid ki hadon ko zid se hi mita dena
    Khule aasmaan me apne paron ko bichhana
    Ud jaana ruke bina bas ud jaana........ Ur RD

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