Tuesday, May 7, 2013

कौन है राजकुमार कौन है राक्षस?

माँ याद है? तुम जब परियों की कहानियाँ सुनाया करती थी, तो अंत में अक्सर कहा करती थी ‘भूरी आँखों वालों का भरोसा न करना, वो धोकेबाज होते हैं’ तुम्हारी कहानी में अक्सर जो राक्षस होते थे, उनकी आँखें भूरी होती थीं..और राजकुमार खूबसूरत, काली आँखों वाला...

तुम्हारी हर कहानी तुम्हारी हर सीख इस ‘वक़्त’ के आगे झूठी पर गयी...जानती हो माँ मेरी उन दोस्तों की ज़िन्दगी से खिलवार करने वाले ‘जिनमें से कोई तेईस साल की थी तो कोई महज़ चार साल की....किसी ने आने वाली ज़िन्दगी के लिए हसीं ख्वाब पिरोये थे, तो कोई अभी ज़िन्दगी के मायने भी नहीं जानती थी’, उनके कातिल की कोई पहचान नहीं है.. किसी में पिता का चेहरा था, तो कोई भाई के भेस में आया था, किसी ने चाचा का रूप धरा था तो कोई ताऊ बन बैठा था...
ये कैसी भूख है इन लोगों की जो सबकुछ भूल बैठे हैं, अब कैसे पहचानू माँ? कौन है राजकुमार कौन है राक्षस?

हर रिश्ते का मज़ाक उड़ाया, हर एहसास को कुचला है,
जोगी सा वो भेस बनाए, सबके घर में घुसता है,
दर्द से जब कराहती है नारी, तो दिल में वो खुश होता है,
ये कैसा संसार है बोलो माँ ये कैसा संसार?

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