Wednesday, June 19, 2013

वो एक ख्याल....................

ये आवाजें... जैसे शोर भर जाती हैं कानों में,
कुछ आहटें... जैसे दिल अपने धडकने का सबब तलाशना चाहता हो इनमें,
तुम बैठे हो ठीक मेरे सामने,
मैं खामोश नज़रों से देखती हूँ तुम्हे,
तुम्हारे होठों पर एक भीनी मुस्कान है,
नज़रों में शरारत, ठीक पहले की तरह,
तुम अपनी दोनों बाहें फैलाते हो,
जैसे बाँध लेना चाहते हो इनमे मुझे हमेशा हमेशा के लिए,
रख लेना चाहते हो मुझे अपने पास... बहुत पास.....
मैंने आँखें अब भी खोल रखी हैं,
कि चाहती हूँ ये लम्हा क़ैद हो जाए मेरी इन दो आँखों में,
कि तुम्हारी सौंधी सी खुशबु को महसूस कर सकूँ, तुम्हे छू सकूँ,
कि अचानक, तुम्हारी बाहें खुद में सिमटने लगती हैं,
की अचानक, तुम्हारे कदम लौटने लगते हैं,
क़दमों की आहट जैसे गुम होने लगी है,
मैं एक लम्बी सांस लेती हूँ, और समझती हूँ
कि बहुत वक़्त हुआ मेरी सांसें रुकी हुई थी...
  

ख्यालों का ताना बाना मुझे अब भी तुमसे जोड़े रखता है,

3 comments:

  1. इन्ख्यालों में भी कई बार देर हो जाए तो बाहें सिमिट जाती हैं .... साथ नहीं मिल पाता ... गहरे ख्वाब से जागे है कोई ...

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