Monday, July 29, 2013

‘हम’ ‘तुम’

हर रिश्ते के दो सिरे थे,
एक ‘हम’ और एक ‘तुम’
जब ‘हम’ ने पकड़ मजबूत की,
तो ‘तुम’ ने पकड़ ढीली छोड़ दी,
वो रिश्ता चलता रहा फिर भी,
बनता रहा, पलता रहा,

लेकिन हमारे साथ ठीक उल्टा हुआ..
जब हमने पकड़ मजबूत की तब तुमने भी मजबूत की,
और जब मजबूरियों ने हमने पकड़ ढीली छोड़ी,
तब तुमने मुझे छोड़ दिया...........

3 comments:

  1. जीवन का सत्य तो यही है ... कौन साथ देता है मजबूरियों में ...
    गहरा एहसास समेटे ...

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  2. Bahut Badhya!
    Par kabhi ye bhi to jaano,
    ki hum ki pakad itni sachhi thi,
    ki kisi aur pakad ki use darkar nahi,
    Ki ye hum hi to hai jo sashwat hai,
    Satya hai, Baaki sab mithya, bas bhram hai!.......RD

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