Wednesday, July 31, 2013

वो....

वो कहता है.. प्रेम है तो स्वीकार करो,
मैं सोचती हूँ, प्रेम बिना ही जीवन पार करूँ,
वो कहता है प्रेम होना सामान्य है,
मैं सोचती हूँ, क्या मेरा प्रेम मान्य है!
वो कहता है, ज़िन्दगी चार दिनों की है..खुश रहो,
मैं सोचती हूँ, दो और दिन जीना अभी बाकी है!
वो कहता है, उसने भी प्यार किया था, वो जानता है,

मैं सोचती हूँ, क्या मेरे दिल का हाल वो पहचानता है!

No comments:

Post a Comment