Wednesday, November 27, 2013

तड़प



यूँ न उलझो मेरी किस्मत से तुम,
कि मेरी तो आदत है
बेवजह के ग़म पालना,
दर्द का पीछा करना,
तन्हाई को खुद चुनना,
रात के पिछले पहर नींद से जागना,
चिल्लाना, खुद को कोसना,
टूटना, बिखरना,
रोना, तड़पना और शिकायत न करना,
फिर समेटना खुद को,
पहनना चेहरे पर मुस्कान का लिबास,
और निकल पड़ना एक और शाम की तलाश में..

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