Friday, December 20, 2013

धीरे धीरे.......



ये मौसम में सर्दी, है हाथों में नरमी,
दिलों में जगे हैं ख्वाब धीरे धीरे,
कि तुमसे हुआ है प्यार धीरे धीरे..

दिलों में वो चाहत, वो हलकी सी आहट
यूँ निकला है सीने से दिल धीरे धीरे,
कि तुमसे हुआ है प्यार धीरे धीरे..

नए ख्वाब जागे, नए रंग लेके
नयी हसरतों ने नए घर बनाए,
यूँ जागी है दिल में उमंग धीरे धीरे,
कि तुमसे हुआ है प्यार धीरे धीरे..

तुम्हे और इस से क्या ज्यादा पता दूँ,
मेरे हाल-ए-दिल को कुछ ऐसे जता दूँ,
यूँ दिनरात हुए बेशरम धीरे धीरे,
कि तुमसे हुआ है प्यार धीरे धीरे..

8 comments:

  1. क्या बात है....लाजवाब

    सादर

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    1. बहुत शुक्रिया यशवंत जी

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  2. कल 22/12/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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    1. आपका शुक्रिया, हमारी आरी तिरछी पंक्तियों को सराहने के लिए...
      शुक्रिया सांझा करने के लिए..

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  3. भावमय .. शब्दों की जादूगरी प्रेम की महक दे रही है ...

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