Saturday, December 21, 2013

सादगी



बड़े से शहर में छोटे से शहर की बेहद आम सी दिखनेवाली लड़की, कद ऊँचा, सुडौल शरीर पर समाज के तानो से परेशां, ‘बाकी सब तो ठीक है पर रंग और गोरा होता तो शादी में दिक्कत न आती आप लोगों को’..

ऋचा, अपने पिता पर गयी थी, इसलिए ख़ूबसूरत सूरत और सीरत होने के बावजूद रंग थोडा मद्धम था, जो अमूमन हमारे समाज में शादी के लिए एक बाधा के रूप में मानी जाती है,
मुझे नहीं करनी शादी....आपलोग राशि की शादी करवा दीजिये, प्लीज माँ मैं पहले ही बेहद परेशां हूँ, जहाँ भी जाती हूँ रिजेक्शन ही सुनना पड़ता है, पता नहीं ये लोग एम्प्लोयी ढूंढते हैं या बहु! मैं कल दिल्ली जा रही हूँ, ऋचा ने अपनी बात कहते हुए अपने कमरे का रुख लिया,
पर सुन तो ऋचा..माँ की बात सुनने से पहले ही ऋचा वहां से जा चुकी थी,
एसेंट के बड़े बड़े इश्तिहार हो या क्लासिफायेड के किसी कोने में लिखे छोटे वाक्यों वाले इश्तेहार..हर जगह फीमेल कैंडिडेट के स्किल्स से ज्यादा उनके लुक की बात लिखी जाती....
‘जी मेरा नाम ऋचा है, मैं यहाँ इंटरव्यू के लिए आई हूँ ...वो कंप्यूटर ऑपरेटर के लिए इश्तहार आया था कल की क्लासिफाइड में, जी मैंने एम् ए किया है साइकोलॉजी में...और टाइपिंग स्पीड काफी अच्छी है, थोड़ी बहुत अंग्रेजी भी बोल लेती हूँ....’ ऋचा अपनी बात बोल ही रही थी कि सामने खड़े युवक ने उसे टोक दिया...

‘जी नहीं तो...हमारे यहाँ से तो कोई एड नहीं आया...’ सामने एक भूरी आँखों वाला लड़का खड़ा था...उम्र कोई चौबीस पच्चीस साल कद लम्बा रंग गोरा, ऋचा की नज़र एक पल को भी उस शख्स के चहरे पर टिकी नहीं , उसने ऑलमोस्ट इरिटेट होते हुए पर्स में से वो पेपर निकाला और कहा ‘देखिये...ये नहीं एस  -५६, जी के टू? नौजवान मुस्कुरा रहा था, हाँ ये एस-५६ तो है, पर जी के टू नहीं वन है’
ओह आई एक सॉरी, एक्सट्रिमली सॉरी.....ऋचा ने हाथ मलते हुए कहा,
‘इट्स कम्प्लीटली ओके, आप चिंता न करें...’ नौजवान ने ऋचा को ढांढस बंधाते हुए कहा,  
‘नहीं नहीं, आई एम् रियली सॉरी, आपको बेवजह तकलीफ दी, और थोडा अजीब ढंग से बात की, वो बात ये है कि मैं दिल्ली में नयी हूँ, ज्यादा कुछ पता नहीं, और फिर एक जगह पहुचने के लिए इतने सारे बसेज चेंज करो....मुझे प्लीज माफ़ कीजियेगा, बस इतना बोल ऋचा मुर गयी,
ऋचा की खनकती सी आवाज़, बड़ी बड़ी आँखें, घुंघराले बाल, और बेहद खूबसूरत से मन ने नमन पर कुछ अजब सा असर कर दिया था, नमन खुद को रोक न सका, सुनिए...
ऋचा मुरी..

जी मेरा नाम नमन कपूर है, आपका?

जी मैं ऋचा...ऋचा मिश्रा...
आप यहाँ नयी हैं?
हाँ, आज सुबह ही दिल्ली आई हूँ, नौकरी की तलाश में हूँ..
हम्म, अगर आप बुरा न माने तो मैं आपके साथ चल सकता हूँ मंजिल तक?
जी, मतलब??
नमन से मुस्कुराते हुए कहा, घबराइये नहीं, बस जी के वन तक साथ चलने की बात कह रहा हूँ, वैसे भी आप यहाँ नयी हैं और इस शहर में अमूमन नए और भोले लोगों को गुमराह करने वालों की कमी नहीं, आप मुझपर यकीन कर सकती हैं’,

ऋचा से ऐसी बातें किसी ने पहली बार कही थी, जहाँ लड़कियों के मन में किसी नज़र में खुद के लिए ख़ास मकाम पाने का एहसास पंद्रह सोलह साल में ही प्रस्फुटित हो चूका होता है, ऋचा को आज चौबीस साल की उम्र में पहली बार हो रहा था,
वो पहली मुलाक़ात, कब अनगिनत मुलाकातों में तब्दील हो गयी दोनों को पता ही न चला...नमन..ऋचा की सादगी से प्यार करता था, और रिचा..नमन के अपनेपन से...इस अनजान शहर में एक ऐसा शख्स जो हर वक़्त उसके चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए कुछ भी कर सकता था, ऋचा जो हमेशा से इस सोच से ग्रसित थी, कि वो खूबसूरत नहीं, उसकी किसी को ज़रुरत नहीं, उस सोच से नमन ने उसे बाहर निकाला था, 

माँ, आपसे कोई बात करना चाहता है...ऋचा ने इतना कहते हुए नमन को फ़ोन पकड़ा दिया...
माँ जी मेरा नाम नमन है, मैं दिल्ली का रहनेवाला हूँ, एक छोटी बहन और एक छोटा भाई है, अपने परिवार में कुछ और लोगों को जोड़ने की इच्छा रखता हूँ,
मैं कुछ समझी नहीं.....माँ ने दूसरी तरफ से कहा,
मैं ऋचा से शादी करना चाहता हूँ, क्या आपलोगों का आशीर्वाद मिल सकता है?
ऋचा ने सोचा नहीं था कि माँ से बात करने की जो इच्छा नमन ने ज़ाहिर की थी, उसके पीछे वजह ‘शादी’ हो सकती है...
ऋचा की आँखों से आंसूं निकल गए...
नमन ने उन्हें थाम लिया....’अपनी आँखों से यूँ पानी न बरसाओ......ज़मीन गीले हो जाएंगे’
नमन की बातें सुन, ऋचा हँसते हुए नमन के गले लग गयी..
ऋचा ने मंजिल को पा लिया था, और नमन ने ऋचा को..

3 comments:

  1. मर्मस्पर्शी कहानी।
    इसका पूर्वार्ध बहुत वास्तविक है लेकिन इसका जैसा अंत हुआ है काश कि सबके साथ ऐसा ही हो।

    सादर

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  2. मार्मिक प्रस्तुति

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