Tuesday, December 31, 2013

बस यूँ ही.....



"कभी दाईं तरफ से, कभी बाईं तरफ से,
मैंने अपनी तस्वीर ली हर तरफ से,
मेरी हर तस्वीर मुझे फिर भी परेशान करती रही,
‘दर्द की मूरत है तू’, मुझे मेरी तस्वीर कहती रही..."

“कहाँ गए वो छुपे इशारे, कहाँ गए ख़ूबसूरत नज़ारे,
कहाँ गयी मेरे दिल की बस्ती, कहाँ गयी वो सुन्दर हस्ती”

“हर सुबह मेरे तकिये पर कुछ गीले आंसू मिलते हैं,
कुछ टूटे ख्वाब मिलते हैं,
मेरी आँखों की कोरों से कुछ सूखे आंसुओं के निशाँ भी मिलते हैं,
सोचती हूँ मेरे बिस्तर पर जाने कौन अधूरा सा शख्स सोता है,
हर रात पिछले पहर जो जी भरकर रोता है,
दर्द के आंसुओं के, सबब पूछूं तो तो खामोश हो जाता है वो,
मुझे मेरे ही घर में आइना दिखलाता है वो...”

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर
    नया वर्ष २०१४ मंगलमय हो |सुख ,शांति ,स्वास्थ्यकर हो |कल्याणकारी हो |
    नई पोस्ट नया वर्ष !
    नई पोस्ट मिशन मून

    ReplyDelete
  2. शुक्रिया सराहने के लिए, नव वर्ष आपको और आपके परिवार का भी मंगलमय हो,
    जी ज़रूर पढ़ेंगे आपके नए पोस्ट.

    ReplyDelete