Thursday, January 2, 2014

मुझे तूने नज़र से यूँ गिरा दिया...



कभी ख़ाक छानी कभी रस्म तोड़े,
कभी ज़ख्म खाए, कभी खूब रोये,
कभी रात रात आँखों में गुजरी,
मेरी तेरी खातिर उम्र गुजरी,
फिर भी तुझे कुछ कम लगा,
मेरी आंसुओं में कमी दिखी,
मेरी चाहतों पर शक किया,
और आखिर जब मैंने हारकर,
तेरी याद में अपनी जान दी,
तुझे तब भी सुकून मिला नहीं,
मुझे तूने नज़र से यूँ गिरा दिया...

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