Saturday, January 25, 2014

वो जो छोटी सी बच्ची...



वो जो छोटी सी बच्ची, हाथों में तितली लिए फिरती थी,
और उड़ जाए वो तितली तो फिर कितनी जोर से हंसती थी,
वो जो छोटी सी बच्ची, रेत पर अपना नाम लिखती थी,
नाम लिख लिख कर हर एक रोज़ खिलखिलाती थी,
वो जो छोटी सी बच्ची, ताश के पत्तों से घर बनाती थी,
और गिर जाए वो घर तो आंसुओं का सैलाब लिए आती थी,
वो जो छोटी सी बच्ची अपनी माँ बाप की दुलारी थी,
आँख का तारा थी उन्हें जान से भी प्यारी थी,
ब्याह में उसके वो खुद को भी लुटा बैठे,
हर जमा पूंजी बेटी के साथ गवां बैठे,
आज उसी छोटी सी बच्ची को मैंने सिसकते देखा,
उम्र के इस दौड़ से तनहा ही जूझते देखा,
नियति के हाथ उसे तिलतिल कर मरते देखा..

5 comments:

  1. बहुत मर्मस्पर्शी और भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

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  2. गहरी अनुभूति की सुन्दर अभिव्यक्ति !
    नई पोस्ट मेरी प्रियतमा आ !
    नई पोस्ट मौसम (शीत काल )

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  3. मर्म स्पर्शीय भाव ... काश ऐसा किसी के साथ न हो ...

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