Wednesday, January 29, 2014

मैं हूँ आम आदमी.......



मैं हूँ आम आदमी, मेरे दो हाथ, दो पैर, दो आँखें, दो कान और एक ज़बान हैं, ‘ज़बान’ जिसका मैं भरपूर इस्तेमाल करता हूँ, ऊपर वाले ने यूँ तो एक दिमाग भी दिया था, पर सोचता हूँ उसको खर्च कौन करे!
इसीलिए दिमाग के लिए मैं खुद से ज्यादा औरों पर निर्भर करता हूँ, मेरी सुबह की शुरुवात अखबारों के साथ होती है, और रात एन डी टी वी या आजतक पर ख़त्म, अखबारों में अमूमन मुझे रेप, लूट, पढ़ना बेहद पसंद है, अगली खबर जिसका मुझे बेसब्री से इंतज़ार रहता है, वो है नेताओं की कारस्तानियाँ, ये खबरें भी बेहद दिलचस्प लगती हैं मुझे, इनको पढ़कर, और पढ़ने के बाद इन्हें भला बुरा कहकर, मुझे बेहद आनंद मिलता है, सुबह का अंत मैं मीठे के साथ करता हूँ, वो है डेल्ही टाइम्स में अश्लील तसवीरें देखना...हर तस्वीर देखने के बाद एक बार अपनी पत्नी से ज़रूर कहता हूँ, ‘क्या हो गया है हमारी कल्चर को’!.. ये हीरोइनों ने तो बर्बाद कर दिया है, क्या असर परेगा इस पीढ़ी पर!

मुझे भीड़ का हिस्सा होना बिलकुल पसंद नहीं, लेकिन विचार वही निकलते हैं जो भीड़ की होती है, ‘पिछले बीस सालों में हमारा भारत बर्बाद हो गया है, अब कुछ नहीं हो सकता इसका, अरे ये कल का आया अरविन्द केजरीवाल क्या कर लेगा? खुद को अनिल कपूर समझता है? यहाँ कोई एक अमरीश पूरी थोड़े ही न है...कुछ नहीं होगा इसका....न धैर्य है, न सही स्टेप्स उठा रहा है...गलती कर दी इस शख्स को वोट देकर, देखना हार जाएगा.....

बस इतना ही कहना जानता हूँ मैं, मुझे कुछ करना नहीं आता, मैं बस बोलना जानता हूँ, और उठने वाले को पैर पकड़कर खीचना जानता हूँ, मैं आम आदमी जो ठहरा, याद है न? मेरा पसंदीदा गेम है दूसरों को ब्लेम करना, अपनी हर परेशानी के लिए दूसरों को कुसूरवार ठहराना, और रात को सुकून से सो जाना ये कहते हुए कि कुछ नहीं हो सकता इस देश का.......

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