Tuesday, February 18, 2014

जो एकतरफा हो..वो प्यार नहीं होता

“प्यार कभी एकतरफा नहीं होता,
और जो एकतरफा हो..वो प्यार नहीं होता”

अब कुछ भी होता नहीं पहले की तरह,
न उम्मीद बंधती है, न पलती है, न टूटती ही है,
तेरे जाने से मेरे दिन रात सुलझ गए हैं,
उधरी थी जो ज़िन्दगी वो फिर से बुन ली है मैंने,
चंद लकीरें हाथों की मिटने लगी थी, उन्हें रंगीन मेहन्दी से महका दिया है,
चंद ख्वाब आँखों के खोने लगे थे, उन्हें फिर से नज़रों में सजा लिया है,
तेरे सितम, तेरे करम, तुझको हो मुबारक,
मैंने जीने की नयी राह पा ली है,
कि मुझे इश्क हुआ है पहली दफा.....ज़िन्दगी से....खुद से...

सुनो,
रिश्तों को बंधनों में ही रहने दो,
खुल गए तो बावरा बनाएंगे तुम्हे,
दिन रात की सुध भुलाएंगे,
अपने पीछे नचाएंगे तुम्हे,
अब तो घर के हो, कल बेघर बनाएंगे तुम्हे,
बंधनों को तोड़कर कौन आजतक आज़ाद हुआ,
खुद की सुध रही नहीं, बेवजह फसाद हुआ,
रिश्तों को बन्धनों में ही रहने दो,
खुल गए तो बावरा बनाएंगे तुम्हे.....

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