Tuesday, March 4, 2014

बस यूँ ही...

वो करता रहा इंतज़ार वक़्त का...इश्क करने के लिए,
हम करते रहे इश्क...हर वक़्त हर पल में उस से,
वो कहता रहा वक़्त सिमित है जी भर के इश्क कर लो,
हम सोचते रहे वो पास है, वक़्त की किसे फिक्र है,
वो सोचता रहा हमसे मिलने के तरीके,
हम हर पल उसकी याद में उसी के साथ जीते रहे,
वो करता रहा शिकायत ज़िन्दगी से मुझे न पाने की,
मैं जीती रही उसी के लिए कि मेरी ज़िन्दगी उसी की अमानत थी..
वो रोता रहा मेरे ग़म में कि मैं बिछड़ जाउंगी उस से,
मैं हंसती रही कि मैं जानती थी ‘वो है तो मैं हूँ, वो नहीं, तो मैं भी नहीं...'

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