Saturday, April 5, 2014

बस यूँ ही...

गुज़रे लम्हों की तहरीर बनती रही,
खामोश सी मैं तस्वीर बनती रही,
धुंआ सा आँखों में दिन रात चुभता रहा,
उसके जाने से मैं और डूबती रही,
रात ख्वाबों में कटते रहे,
मैं बस इक तुझे सोचती रही,
नब्ज़ जब डूबने लगे मेरे,
तेरे होने की इक लकीर ढूंढती रही,
गुज़रे लम्हों की तहरीर बनती रही,

खामोश सी मैं तस्वीर बनती रही….

No comments:

Post a Comment