Friday, April 25, 2014

बस यूँ ही.....

“वो एक-तरफ़ा थी याद,
या एक-तरफ़ा थी सोच,
वो एक-तरफ़ा था प्यार
या बेहद तनहा थे हम!”

चलो अच्छा हुआ जो तुमने भरम तोड़ दिया,
प्यार का और इरादों का क़सम तोड़ दिया,
नींद में चौंकते तो क्या होता,
जागती आँख में बसते थे जो ख्वाब तोड़ दिया,
गुज़रे लम्हों में सौंधी खुशबू सी जो मिलती रही,
जिनको दिन रात अपने गेसू में पिरोती रही,
वो जो एक सिलसिला था अपना उसे तोड़ दिया,
चलो अच्छा हुआ जो तुमने भरम तोड़ दिया,
प्यार का और इरादों का क़सम तोड़ दिया...

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