Tuesday, May 13, 2014

बस एक प्याली सांस.....

दिल के अन्दर, बहुत अन्दर...बेहद तन्हाई है,
हर शाम की तरह, ये शाम भी सर झुकाए चली आई है,
रात गुजरने का, दिन के आने का इंतज़ार भला कब तक करें,
सुबह से शाम तक, शाम से सुबह तक, कहो कितना चलें,
फिर कोई वादे की लकीर इन हाथों में छोड़कर चले जाओ,

एक प्याली सांस मेरे सीने में फिर से भर जाओ..... 

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