Wednesday, March 18, 2015

बस यूँ ही.....

1.
“हज़ारों ख्वाब देख डाले मेरी आँखों ने, 
उस रोज़ जब तूने कहा,

‘मैं फिर आऊंगा’”

2.
"अधूरे ख्वाबों की दहलीज़ पर खड़ा,
आज भी मेरी राह तकता होगा,
दिन की सुध होगी कहाँ उसको,
रात भी जागते काटता होगा,

नर्म होठों की सलवटें, चाँद आँखों की शिक़न,
दर्द में डूबी वो आहें, रात भर मुझको पुकारती होंगी,
आज भी उसकी दो निगाहें,
बेवजह मुझको तलाशती होंगी...."

6 comments:

  1. जो लहरों से आगे नज़र देख पाती, तो तुम जान लेते मैं क्या सोचता हूँ,
    वो आवाज़ तुमको भी जो भेद जाती, तो तुम जान लेते मैं क्या सोचता हूँ!
    ज़िद का तुम्हारे जो परदा सरकता, खिड़कियों से आगे भी तुम देख पाते,
    आँखों से आदतों की जो पलकें हटाते, तो तुम जान लेते मैं क्या सोचता हूँ !

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