Tuesday, March 3, 2015

चलो खामोशी की सब दीवार तोड़ते हैं........

चलो खामोशी की सब दीवार तोड़ते हैं,
तुम हमसे कहो, हम तुमसे बोलते हैं,
दिल से ज़ख्म, ज़ख्म से दर्द का सफ़र बहुत हुआ,
आज मरहम की कुछ बात बोलते हैं,
तुम हमसे कहो, हम तुमसे बोलते हैं,
चलो खामोशी की सब दीवार तोड़ते हैं...

सूना है दिल के ज़ख्म यूँ भरा नहीं करते,
ग़म की रात में, ख्वाब बुना नहीं करते,
पाँव में बेड़ी हो, होठों पर ताले,
तो नए रिश्ते यूँही चुना नहीं करते,

स्याह रातों का सफ़र बहुत हुआ,
बंद दरवाज़ों का, खामोश आवाजों का,
तनहा ज़िन्दगी का सफ़र बहुत हुआ,
आज माजी की हर परत खोलते हैं,
तुम हमसे कहो, हम तुमसे बोलते हैं,

चलो खामोशी की सब दीवार तोड़ते हैं...

2 comments:

  1. सूना है दिल के ज़ख्म यूँ भरा नहीं करते,
    ग़म की रात में, ख्वाब बुना नहीं करते,
    पाँव में बेड़ी हो, होठों पर ताले,
    तो नए रिश्ते यूँही चुना नहीं करते..........बहुत अच्छा लिखा है

    ReplyDelete
  2. सूना है दिल के ज़ख्म यूँ भरा नहीं करते,
    ग़म की रात में, ख्वाब बुना नहीं करते,
    पाँव में बेड़ी हो, होठों पर ताले,
    तो नए रिश्ते यूँही चुना नहीं करते..........बहुत अच्छा लिखा है

    ReplyDelete