Thursday, July 13, 2017

तुम...और तुम्हारी मैं...

वो अपनी नज़रों से दुनिया देखना चाहता था..
मैं उसकी नज़रों से, 
वो चाँद, तारों का साथ चाहता था,
मैं.... उसका,
वो ज़िन्दगी की हक़ीक़तों से मुझे रु-ब-रु कराना चाहता था,
मैं जीवन भर उसके ख्वाब देखना चाहती थी,
वो मेरे साथ होकर भी मेरा न था,
मैं उस से दूर जाकर भी उसकी ही रही...

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