Thursday, July 27, 2017

बस यूँही

जिन लकीरों पर तुम्हारा नाम लिखा था,
वो लकीरें अब घिसने लगी हैं,
ज़िन्दगी एक लम्बी उम्र तय कर,
जाने कहाँ पहोच गयी है,
तुम्हारा साथ एक सपना सा लगता है अब तो,
तुम्हारी याद, जैसे पिछले जनम से कोई आवाज़ देता हो,
क्या हम तुम वाकई एक दुसरे के लिए बने थे!

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